मध्यप्रदेश नए सीएम पर आया कर्ज का भार, कहीं लाडली बहना योजना ना हो जाए इसकी शिकार  

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता से बड़े-बड़े वादे करके मतदान एक पक्ष में करके प्रचंड विजय हासिल करने वाली भाजपा सरकार के लिए चुनौतियाँ से भरी घड़ी आ गई है क्योंकि चुनाव में जीत हासिल कर राज्य में अपना परचम लहराने के लिए भाजपा ने प्रदेश की जनता से जो वादे किये थे अब उन सभी वादों को पूरा करने का समय आ गया है। 

यदि देखा जाए तो चुनाव में भाजपा को मिली इस प्रचंड जीत का कारण लाडली बहना योजना है क्योंकि लाडली बहना योजना के माध्यम से ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में महिला वोट बैंक को बीजेपी के पक्ष में किया था लेकिन शिवराज सरकार द्वारा चलायी गई इस योजना ने अब मोहन यादव सरकार के गले पर तलवार लटका दी है। 

बता दें कि लाडली बहना योजना के तहत प्रदेश की 1.32 करोड़ महिलाएँ को शिवराज सरकार ने 1250 रुपए की आर्थिक सहायता राशि पिछले 7 महीने से उनके डीबीटी अकाउंट में डाली है इसके साथ ही शिवराज सरकार ने 450 में गैस सिलेंडर और छात्रों को स्कूटी प्रदान की जिसके लिए उन्होंने एक विशाल रकम राजकीय खजाने से खर्च की और कर्ज लिया। शिवराज सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं के कारण आज राज्य की मोहन यादव सरकार पर लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ का कर्ज है। 

शिवराज सरकार का 3.5 लाख करोड़ का कर्ज 

 विधानसभा चुनाव में भाजपा का सिक्का जमाने के लिए भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक लंबे समय से तैयारी शुरू कर दी थी जिसमें सरकार द्वारा संचालित छात्रों को स्कूटी देने, प्रदेश की लाडली बहनों को सहायता राशि प्रदान करने, 450 रुपये में गैस सिलेंडर देने के साथ-साथ अतिथि विद्वानों को मानदेय देने और संविदा कर्मचारियों को मानदेय देने के लिए शिवराज सरकार ने राजकीय खजाने से 3.5 लाख करोड़ का कर्ज लिया जिसका हरजाना अब मोहन यादव सरकार को भरना पड़ रहा है। 

लाडली बहना सहित काई योजना पर कटौती की तलवार 

लाडली बहना योजना जिसका लाभ महिलाएं पिछले 7 महीने से लेती आ रही है उसकी वजह से राज्य तकरीबन 3.5 लाख करोड़ के कर्ज में डूब गया है जिस वजह से लाडली बहना योजना सहित अन्य योजनाओं को पूरा कर पाना मुश्किल लग रहा है और अगर इन सभी योजनाओं को आगे भी इसी प्रकार चलाने और चुनावी वादों को पूरा करने के लिए सरकार प्रयास करती है तो उसको 25 हज़ार करोड़ का कर्ज और लेना पड़ सकता है। 

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योजना को संचालित करने से पहले लेनी होगी अनुमति 

वर्तमान स्थिति को देखते हुए वित्त विभाग ने सरकार को राजस्व संग्रह का लक्ष्य हासिल करने के साथ-साथ कई योजनाओं पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं सरकार को कई योजनाओं को आगे संचालित करने से पहले विभाग से अनुमति लेनी होगी जिसका बहुत बड़ा असर महाकाल परिसर विकास योजना के साथ मेट्रो ट्रेन और तीर्थ दर्शन योजना पर पड़ सकता है। 

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